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पाॅक्सो - परिचय

Last Updated On: 15/04/2019

अधिक स्पष्ट तथा कठोर कानूनी प्रावधानों के माध्यम से बच्चों के लैंगिक दुव्र्यवहार तथा लैंगिक उत्पीड़न के जघन्य अपराधों के प्रभावी समाधान के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पाॅक्सो) अधिनियम, 2012 को लागू करने का समर्थन किया।
इस अधिनियम में बालक से आशय किसी ऐसे व्यक्ति से है जिसकी आयु 18 वर्ष से कम है तथा यह बच्चे के सर्वोत्तम हितों तथा भलाई के लिए कार्य करता है और उसे हर चरण पर सर्वोपरि महत्त्व देता है। यह बच्चे का स्वस्थ शारीरिक, भावानात्मक, बौद्धिक तथा सामाजिक विकास सुनिश्चित करता है। यह विभिन्न प्रकार के लैंगिक दुव्र्यवहार को परिभाषित करता है जिसमें प्रवेशन और गैर-प्रवेशन हमला, तथा लैंगिक उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी शामिल है। यह किसी लैंगिक हमले को तब ‘अतिगंभीर’ मानता है जब वह कतिपय परिस्थितियों में किया गया हो जैसे कि तब जब उत्पीड़न का शिकार बच्चा मानसिक रूप से बीमार हो, या कि जब अपराधी कोई विश्वसनीय व्यक्ति या किसी पद पर आसीन व्यक्ति हो जैसे कि परिवार का कोई सदस्य, पुलिस अधिकारी, शिक्षक या चिकित्सक। ऐसे व्यक्ति जो लैंगिक प्रयोजनों के लिए बच्चों की तस्करी करते हैं, अधिनियम के अवप्रेरण संबंधी प्रावधानों के अन्तर्गत दण्डनीय हैं। इस अधिनियम में अपराध की गंभीरता के अनुसार ग्रेडिड कठोर को निर्धारित किया गया है जिसमें अधिकतम दण्ड आजीवन कठोर कारावास और जुर्माना है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पाॅक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा 44 तथा पाॅक्सो नियम, 2012 के नियम 6 के अधीन उनको समनुदेशित कृत्यों के अतिरिक्त निम्नलिखित कार्य करेगा:-
1.    लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पाॅक्सो) अधिनियम, 2012 के क्रियान्वयन को माॅनीटर करना;
2.    राज्य सरकारों द्वारा विशेष न्यायालयों के पदाभिधान को माॅनीटर करना;
3.    राज्य सरकारों द्वारा लोक अभियोजकों की नियुक्ति को माॅनीटर करना;
4.    राज्य सरकारों द्वारा बालक की विचारण पूर्व तथा विचारण के स्तर पर सहायता से सहबद्ध गैर सरकारी संगठनों, व्यवसायियों तथा विशेषज्ञों या मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य तथा बाल विकास की ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों के उपयोग के लिए अधिनियम की धारा 39 में वर्णित मार्गनिर्देश बनाने को माॅनीटर करना और इन मार्गनिर्देशों को लागू करने को माॅनीटर करना;
5.    इन अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के प्रभावी निर्वहन के लिए प्रशिक्षण पुलिस कार्मिकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों, जिसके अन्तर्गत केन्द्रीय व राज्य सरकारों के अधिकारी भी हैं के लिए निश्चयिका के डिजाइन और कार्यान्वयन को माॅनीटर करना;
6.    मीडिया, जिसके अन्तर्गत टेलीविजन, रेडियो तथा प्रिंट मीडिया के माध्यम से नियमित अन्तरालों पर अधिनियम के उपबंधों से संबंधित सूचनाओं के प्रसार के लिए केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों को माॅनीटर करना और उनकी सहायता करना जिससे अधिनियम के उपबंधों को प्रति जनसाधारण, बालकों के साथ ही साथ उनके माता-पिता और संरक्षकों को जागरूक किया जा सके;
7.    किसी बाल कल्याण समिति की अधिकारिता के भीतर आने वाले बाल लैंगिक दुव्र्यवहार के किसी भी विनिर्दिष्ट मामले पर रिपोर्ट मांगना;  
8.    स्वप्रेरणा से या सुसंगत अभिकरणो से लैंगिक दुरूपयोग के रिपोर्ट किए गए मामले और अधिनियम के अधीन स्थापित प्रक्रिया के अधीन उनके निपटारे की बाबत सूचना और आंकड़े एकत्रित करना जिसके अंतर्गत निम्नलिखित सूचना भी है:-
ऽ    अधिनियम के अधीन रिपोर्ट किये गये अपराधों की संख्या एवं ब्यौरे;
ऽ    क्या अधिनियम और नियमों के अधीन विहित प्रक्रियाओं का अनुसरण किया गया है जिसके अंतर्गत समयसीमा से संबंधित प्रक्रिया भी है;
ऽ    अधिनियम के अधीन अपराधों के पीड़ितों की देखरेख तथा संरक्षण के लिए व्यवस्था के ब्यौरे जिसके अंतर्गत आपात चिकित्सा देखरेख और चिकित्सा परीक्षा की व्यवस्था भी हैै;
ऽ    संबंधित बाल कल्याण समिति द्वारा किसी भी विनिर्दिष्ट मामले में किसी बालक की देखरेख और संरक्षण के लिए आवश्यकता के निर्धारण की बाबत ब्यौरे;
9.    अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन का आकलन करना तथा संसद के समक्ष रखी जाने वाली अपनी रिपोर्ट में एक अलग अध्याय में रिपोर्ट शामिल करना।

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